
Sakhi Sarwar Sultan Lakhdata Peer JI
लखदाता पीर जी का इतिहास
लखदाता पीर जी, जिन्हें सखी सरवर के नाम से भी जाना जाता है, 12वीं सदी के महान सूफी संत थे। उनका वास्तविक नाम हज़रत सैयद अहमद सुल्तान था और वे बगदाद से जुड़े पवित्र वंश के माने जाते हैं। उन्होंने अपने जीवन को मानवता की सेवा और लोगों की भलाई के लिए समर्पित किया। उन्हें “लखदाता” इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे लाखों भक्तों की मुरादें पूरी करते हैं और दुखों को दूर करते हैं।
आज भी उनके दरबार में हर धर्म के लोग श्रद्धा और विश्वास के साथ आते हैं और सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होने की आस्था रखते हैं। उनके प्रमुख निगाहे भारत और पाकिस्तान में स्थित हैं, जहां विशेष अवसरों पर भव्य मेले और धार्मिक आयोजन होते हैं। भक्त दूर-दूर से आकर सुख-शांति और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
कहा जाता है कि लखदाता पीर जी ने अपने जीवन में अनेक चमत्कार किए और जरूरतमंदों की हर संभव सहायता की। उनकी कृपा से असंभव भी संभव हो जाता है, इसलिए उन्हें निगाहिया पीर भी कहा जाता है। उनके दरबार में आने वाला हर भक्त अपने जीवन में आशा, विश्वास और नई ऊर्जा लेकर लौटता है।
लखदाता पीर जी का संदेश यही है कि इंसानियत, सेवा और सच्ची भक्ति ही सबसे बड़ा धर्म है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि बिना भेदभाव के सभी की मदद करना ही सच्ची इबादत है।


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